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कठुआ और उन्नाव की दर्दनाक हादसे और साजिश पर एक नजर..

आपको गुस्सा सिर्फ जेएनयु में नारे लगने से आता है या किसी बच्ची के साथ हुए दुषकर्म पर भी आता है? कठुआ और उन्नाव में जो दरिंदगी कुछ लोगों ने की है उन्हें इंसान नही कहा जाना चाहिए क्योंकि ऐसा काम तो कोई जानवर भी नहीं करेगा। माफ कर दीजिएगा मुझे इस लेख की भाषा पर, क्योंकि मुझे तो गुस्सा आता है ऐसी हैवानियत पर, इसलिए शायद ये लेख थोड़ा आक्रमक हो सकता है।
शर्म की बात तो ये है कि इसमें देश की प्रशासन और नेता भी मिले हुये है, ये परिस्थिति तो बिलकुल 90 के दशक की हिन्दीं फिल्मों की तरह हो गयी है जहां सबलोग मिलकर गरीब पर जुर्म करते है। अगर देश को संभालने वाले नेता और पुलिस ही इसमें शामिल हो गयी है तो अब आम नागरिक कहां जाए। हमने उनको चुना है ताकि वो हमारे परेशानियों को दुर करें नाकि हमारे बच्चों, बहनों और माताऔं के साथ दुषकर्म में शामिल हो।
ऐसा कहते है जुर्म करने वाले से ज्यादा उसे बचाने वाला गुनहगार होता है। कठुआ और उन्नाव दोनों ही जगहों पर आरोपियों को बचाने की कोशिश की गयी है वो भी लोकतंत्र के दो सिपाही नेता और प्रशासन के द्वारा। कठुआ में बच्ची के साथ मंदिर जैसे पवित्र जगह पर पांच दिनों के साथ जो हुआ अगर इससे आपको गुस्सा नहीं आता है तो आप जरुर दिल से बहुत मजबुत होंगें। उस बच्ची के साथ जो हुआ वो सिर्फ इस वजह से हुआ क्योंकि जिस समुदाय से वो लड़की आती है, स्थानीय लोग उस समुदाय को डरा कर गांव से भगाना चाहते है।
हाथ में तिरंगा लिये और जय श्री राम का नारा लगाते हुये आरोपियों को बचाने के लिए जो पहल स्थानीय लोग ने लोकतंत्र के राष्ट्रवाद का सहारा लेते हुए किया है इसकी वयाख्या नहीं की जा सकती। और तो और वकीलों द्वारा पुलिस को चार्जशीट तैयार करने से रोकना ये सोचने पर मजबुर करता है कि कहां जा रही है हमारी सोच और क्यों फसते है हम नेताऔं के सियासी चंगुलों में।
जरा सोचिए राष्ट्रवाद के नाम पर कोई आपके प्रिय के साथ ऐसी हैवानियत करें, क्या तब भी आप ऐसा होने देंगें या न्याय दिलाने की पूरी कोशिश करेंगें। उन्नाव में विधायक पर जो आरोप लगें है वो बेहद गंभीर है और हमारी वोट डालने के फैसले पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। न्याय के रास्ते में पुलिस, नेता और अन्य सरकारी कर्मचारीयों ने जो बाधाएं डाली वो पीड़ित के पिता की जान लेने से कम ही नजर आती है। मारपीट कर पीड़ित के पिता को पहले तो केस वापस लेने के लिए मजबुर किया फिर साजिश के तहत आर्म्स एक्ट में फसाया उसके बाद कथित तौर पर इतना मारा की जान ही ले ली।

अब अगर आज हम इन दोनों को इंसाफ नहीं दिला पाए तो ये हमारे देश के लिए इस साल की सबसे बड़ी हार होगी। हम सभी देशवासियों को ये समझना चाहिए कि ये हार ऐसी घटनाओं को और बढ़ावा देंगी। ऐसा दोबारा न हो इसलिये अभी ही सही वक्त है इन ताकतवर लोगों को लोकतंत्र के सहारे हरा कर पीड़ितों को इंसाफ दिलाने का। 

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